Friday, October 7, 2011

दुनिया में बड़ी चीज़ मेरी जान ! हैं आँखें

हर तरह के जज्बात का ऐलान है आँख 
शबनम कभी ,शोला कभी तूफ़ान है आँखें 

आँखों  से  बड़ी  कोई  तराजू  नहीं  होती 
तुलता है बशर जिसमें वो मीज़ान हैं आँखें 

आँखें ही मिलाती  हैं  जमाने में दिलों को 
अनजान हैं हम तुम अगर अनजान हैं आँखें 

लब कुछ भी कहें इससे हक़ीक़त नहीं खुलती 
इंसान   के  सच  झूठ  की  पहचान  हैं   आँखें 

आँखें  न  झुकें  तेरी  किसी  गैर  के  आगे 
दुनिया  में  बड़ी  चीज़  मेरी जान  !  हैं  आँखें 

                         -साहिर लुधियानवी

7 comments:

  1. बहुत बढिया,
    साहिर जी को पढना अपने आप में शुकून और आनंद देता है।


    हर तरह के जज्बात का ऐलान है आँख
    शबनम कभी ,शोला कभी तूफ़ान है आँखें

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  2. फुर्सत के कुछ लम्हे--
    रविवार चर्चा-मंच पर |
    अपनी उत्कृष्ट प्रस्तुति के साथ,
    आइये करिए यह सफ़र ||
    चर्चा मंच - 662
    http://charchamanch.blogspot.com/

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  3. आँखें ही मिलाती हैं जमाने में दिलों को
    अनजान हैं हम तुम अगर अनजान हैं आँखें

    Nice .

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  4. "आँखें न झुकें तेरी किसी गैर के आगे
    दुनिया में बड़ी चीज़ मेरी जान ! हैं आँखें "

    बस नाम ही काफी है......साहिरजी !!

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  5. आँखों से बड़ी कोई तराजू नहीं होती
    तुलता है बशर जिसमें वो मीज़ान हैं आँखें.. bhaut hi acchi panktiya...

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  6. इंसान के सच झूठ की पहचान हैं आँखें ..
    साहिर साहब की अलग पहचान झाई उर्दू शायरी में ... बहुत ही कमाल की गज़ल उठाई है आपने ..

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