Thursday, April 12, 2012

मज़े जो मौत के आशिक बयां करते

मज़े  जो  मौत  के  आशिक  बयां  करते 
मसीहो - खिज्र  भी  मरने की आर्ज़ू करते 

अगर ये जानते चुन-चुन के हम को तोड़ेंगे 
तो गुल कभी न तमन्ना- ए- रंगो-बू करते 

समझ ये दारो-रसन ,तारो-सोज़न ऐ मंसूर 
कि चाके - पर्दा हक़ीक़त का है रफ़ू  करते 

यकीं है सुब्हे-क़यामत को भी सुबूही-कश
उठेंगे ख़्वाब  से  साक़ी  , सुबू - सुबू  करते 
                                                         -ज़ौक

4 comments:

  1. अगर ये जानते चुन-चुन के हम को तोड़ेंगे
    तो गुल कभी न तमन्ना- ए- रंगो-बू करते

    bahut khoob.....!!

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  2. उत्कृष्ट प्रस्तुति |
    बहुत बहुत बधाई ||

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  3. बेहतरीन प्रस्तुति।

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