Thursday, January 27, 2011

आगाज़ तो होता है ............

आगाज़   तो   होता   है   अंजाम   नहीं   होता 
जब  मेरी  कहानी  में   वह  नाम   नहीं   होता 


जब जुल्फ  की कालिख में गुम जाए कोई राही 
बदनाम    सही  लेकिन   गुमनाम   नहीं  होता 


हंस -हंस के जवां दिल के हम क्यों न चुने टुकडे
हर  शख्स  की  किस्मत  में  इनाम  नहीं   होता 


बहते   हुए  आंसू   ने  आखों  से  कहा  थम  कर 
जो मय  से  पिघल  जाए  वह  जाम  नहीं  होता 


दिन   डूबे    हैं    या   डूबी   बरात   लिए  कश्ती 
साहिल   पे   मगर  कोई   कोहराम  नहीं   होता 


          साभार : मीना कुमारी 

6 comments:

  1. आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार 29.01.2011 को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.uchcharan.com/
    आपका नया चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

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  2. बहुत बहुत आभार इस मोहक सुन्दर रचना को पढवाने के लिए...

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  3. जब जुल्फ की कालिख में गुम जाए कोई राही
    बदनाम सही लेकिन गुमनाम नहीं होता

    इस सुन्दर रचना से परिचय कराने के लिए धन्यवाद..

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  4. संकलन में आने के लिये और उत्साहवर्धन के लिए आप सबका आभार .

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